शरद पूर्णिमा 2025 : Amazing Importance, कथा, व्रत और पूजन विधि

शरद पूर्णिमा

परिचय: शरद पूर्णिमा क्या है?

शरद पूर्णिमा 2025, जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, Navratri 2025 के अंतर्गत आती है और इसे मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए मनाया जाता है। इस त्योहार की महत्वपूर्ण कथा और पूजा विधि सभी भक्तों के लिए जानना आवश्यक है। इसके बाद आने वाला Bhai Dooj 2025 भी परिवार और भाई-बहन के रिश्तों को मजबूत करने वाला पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण तेज और औषधीय गुणों के साथ धरती पर अमृत की वर्षा करता है। इसीलिए लोग इस रात खीर बनाकर चाँदनी में रखते हैं और अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं

शरद पूर्णिमा को वर्ष की सबसे उज्ज्वल पूर्णिमा की रात भी कहा जाता है। यह ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है और भक्तों के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और भक्ति का संदेश लेकर आती है।

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

यह उत्सव धार्मिक आस्था और जीवनशैली दोनों से जुड़ा है। इसे मनाने के पीछे कई कारण हैं:

मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए – मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है। जो लोग जागरण कर भक्ति करते हैं, उन्हें मां लक्ष्मी धन, धान्य और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं

चंद्रमा की औषधीय किरणें – आयुर्वेद के अनुसार, इस रात चंद्रमा की किरणें शरीर और मन के लिए अमृत तुल्य मानी जाती हैं।

किसानों का पर्व – शरद पूर्णिमा फसल कटाई के समय आती है। इसे प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व भी माना जाता है।

शरद पूर्णिमा की पौराणिक कथाएँ

  1. मां लक्ष्मी की कथा

मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और जो लोग जागकर उनका स्मरण करते हैं उन्हें अपार धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। इसीलिए इस दिन को कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है, जिसका अर्थ है – “कौन जाग रहा है?”

  1. भगवान श्रीकृष्ण का रासलीला

शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात भगवान कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ रास रचाया था। चाँदनी रात, बांसुरी की मधुर ध्वनि और भक्ति का यह अद्भुत संगम आज भी इस पर्व को विशेष बना देता है। यह कथा आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक मानी जाती है।

  1. चंद्रमा का अमृत

एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस रात चंद्रमा अमृत की वर्षा करता है। चाँदनी में रखी खीर इस अमृत को अपने भीतर समाहित कर लेती है और प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने पर यह शरीर को शक्ति और रोगों से मुक्ति प्रदान करती है।

व्रत और पूजन विधि

खीर बनाना और चाँदनी में रखना – इस दिन दूध और चावल से खीर बनाकर खुले आकाश में रखी जाती है। सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

जागरण करना – रातभर भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार करते हुए जागना शुभ माना जाता है।

व्रत रखना – कई भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं।

लक्ष्मी पूजन – इस दिन मां लक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाता है और घरों को दीपक व रोशनी से सजाया जाता है।

दान-पुण्य – अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

शरद पूर्णिमा का स्वास्थ्य और वैज्ञानिक महत्व

चंद्रमा की किरणों का लाभ – आयुर्वेद मानता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें शरीर की ऊर्जा को संतुलित करती हैं और मानसिक शांति देती हैं।

खीर का औषधीय महत्व – चाँदनी में रखी खीर औषधीय गुणों से युक्त हो जाती है, जिसे स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।

ऋतु परिवर्तन – यह पर्व बरसात के अंत और शीत ऋतु की शुरुआत का सूचक है। इस समय उपवास और हल्का भोजन शरीर को रोगों से बचाता है।

शरद पूर्णिमा का क्षेत्रीय महत्व

उत्तर भारत – खीर, उपवास और लक्ष्मी पूजन प्रमुख हैं।

महाराष्ट्र व बंगाल – इसे कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है, जहां लोग जागरण कर लक्ष्मी पूजन करते हैं।

ओडिशा व असम – इस दिन घर-घर में लक्ष्मी पूजन होता है।

मथुरा-वृंदावन – रासलीला का विशेष आयोजन होता है।

आधुनिक जीवन में शरद पूर्णिमा का महत्व

यह परिवार और समाज को एकजुट करने का अवसर है।

लोगों को भक्ति, ध्यान और सत्संग की ओर प्रेरित करता है।

स्वास्थ्य और ऋतु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाता है।

हमारी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का अवसर प्रदान करता है।

शरद पूर्णिमा 2025 – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1. शरद पूर्णिमा 2025 कब है?
उत्तर: शरद पूर्णिमा 2025 में 6 अक्टूबर, शुक्रवार को है।

प्रश्न 2. शरद पूर्णिमा को खीर क्यों बनाई जाती है?
उत्तर: मान्यता है कि चंद्रमा की किरणें इस रात अमृत का संचार करती हैं। खीर को चाँदनी में रखने से वह पवित्र और औषधीय गुणों से युक्त हो जाती है।

प्रश्न 3. शरद पूर्णिमा पर किसकी पूजा होती है?
उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण का रासलीला भी स्मरण किया जाता है।

प्रश्न 4. क्या शरद पूर्णिमा पर उपवास करना आवश्यक है?
उत्तर: उपवास करना अनिवार्य नहीं है, लेकिन कई भक्त श्रद्धा से इसे करते हैं।

प्रश्न 5. वैज्ञानिक दृष्टि से शरद पूर्णिमा का क्या महत्व है?
उत्तर: इस रात चंद्रमा की रोशनी में विशेष ऊर्जा होती है, जो शरीर को शांति और रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है।

प्रश्न 6. कोजागरी पूर्णिमा का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘कोजागरी’ शब्द संस्कृत के “को जागर्ति?” से बना है, जिसका अर्थ है – “कौन जाग रहा है?” यानी जो इस रात जागकर भक्ति करता है, उसे लक्ष्मी कृपा मिलती है।

प्रश्न 7. शरद पूर्णिमा की रात क्यों जागरण करना शुभ माना जाता है?
उत्तर: मान्यता है कि इस रात जागरण करने से मन और आत्मा को शांति मिलती है, और धन-संपत्ति के लिए भी लाभकारी होती है।

प्रश्न 8. शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने का शुभ समय क्या है?
उत्तर: इसे प्रायः पूर्णिमा की रात में चाँद निकलने के तुरंत बाद रखा जाता है। कुछ लोग इसे शाम 6 बजे से चाँद निकलने तक तैयार कर देते हैं।

प्रश्न 9. शरद पूर्णिमा से जुड़ी खास रीतियाँ क्या हैं?
उत्तर: खीर चाँदनी में रखना, मां लक्ष्मी का पूजन करना, रातभर जागरण करना और भजन-कीर्तन करना प्रमुख रीतियाँ हैं।

प्रश्न 10. शरद पूर्णिमा का त्योहार किस उद्देश्य से मनाया जाता है?
उत्तर: यह त्योहार मुख्यतः कृषि समृद्धि, धन, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए मनाया जाता है।

निष्कर्ष

यह केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और भक्ति का प्रतीक है। इसकी कथाएँ और परंपराएँ हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य, ऋतु परिवर्तन के महत्व और आध्यात्मिक साधना का संदेश देती हैं।

2025 की शरद पूर्णिमा हमें अवसर देती है कि हम मां लक्ष्मी और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करें, चाँदनी रात का आनंद लें और स्वास्थ्य व समृद्धि की कामना करें।

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